मैं बताऊँ आपको....

 

सर नमस्ते......आप यही हैं या बाहर ?

जी....जी.....नमस्ते...........अरे अरे अरे.....वो क्या उस दिन थोडा काम आ गया था तो मैं हाजिर नहीं हो पाया | आप हैं अभी ऑफिस में तो पांच मिनट में हाजिर होता हूँ....बस अभी घर पहुंचा ही था और आपका फ़ोन आ गया | बस ये आया......

ठीक है सर........

आधे घंटे बाद ऑफिस पहुंचकर......

अरे क्या बताऊँ आपको आज तो बहुत अच्छा हुआ जो मिसेज ने मुझे जिद करके सुबह 8 बजे ही दाल बाटी खिला दी | फिर मिसेज को छोड़ा मैंने कार्यालय और मैं गया .......... आपको बताऊँ पहले मैं सुबह .......(स्थान का नाम उद्देश्य पूर्वक नहीं बताया जा रहा हैं) गया वहां से मैं  10 बजे यहाँ गया और फिर अपने यहाँ आकर यहाँ सबसे बात की | अब क्या बताऊँ आपको एक मैं ही हूँ दौड़ने वाला | कोई नहीं आता हैं मैं आपको बताऊँ..........सारा काम मुझे ही करना पड़ता हैं ...........बस यहाँ से वहां दौड़ता रहता हूँ अकेला ही | अब यहाँ से कहाँ कहाँ जाऊँगा और घर कब पहुंचूंगा तथा मैं कितना काम करता हूँ की साडी जानकारी देने के बाद.....चलिए फिर करते हैं आपने जो कहाँ फिर बात कर लेंगे हम उसके लिए........|

(बात बात में ही सभी पञ्च परमेश्वरों को निकम्मा करार देकर फिर पुत्र पुराण गाया गया | जिस वक्ता के बारे हम जयादा कुछ नहीं जानते थे अगले 30 मिनट में तो समाज सेवा, नौकरी, श्रीमती जी, पुत्र, पुत्र वधु और पौत्र सभी की पिछले कई वर्षों की जानकारी साझा कर ली गई | आज पौत्र की कोई फरमाइश पूरी की जानी है ये बताकर बात को विराम दिया गया |)

जाते जाते आखिर उस बात का जिक्र तो हो ही गया जो उनसे करनी थी | और समझदार वक्ता ने उस विषय को मात्र ३० सेकंड में ही समेट भी दिया |

खैर  , विषय ये था ही नहीं कि किसकी बात कितनी देर की या दूसरी बात क्यों की गई | विषय है कुछ प्रश्नों का-

१. महत्वपूर्ण क्या हैं ? कोई विषय जिस पर चर्चा होनी है ? अथवा उस व्यक्ति की इच्छा का जो अवसर को अपना बना ले और जो कहना चाहे कहता जाए ?

२.  रोजमर्रा की बात को भी इतना महत्वपूर्ण बनाकर कैसे बताया जाता है ?

३. अर्थ तो खैर किसी भी बात का नहीं होता फिर ये इतनी साधारण सी बात को असाधारण कैसे बनाते हैं ?

४. अपनी बातों को कहने में या किसी को सुनाने में ये इतना उत्साह कहाँ से लाते है लोग ? 

५. और ये जो अतिउत्साही लोगों को सुनते हैं वो सुनने वाले लोग कहाँ मिलते हैं और वे इतना धीरज कहाँ से लाते हैं ?

६. कहीं तो आदमी कुछ भी बोल रहा है और कोई कुछ भी सुन रहा हैं | दूसरी तरफ कोई आदमी है जो अपनी महत्वपूर्ण बात भी कह नहीं पाता तो कोई है जो अपनी ही बात किसी को सुनाने के लिए कऊंस्लर को हायर करके फ़ीस दे रहा है ?

अजीब विडम्बना है ये............

 


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