आत्महत्या - हार या जीत
आत्महत्या - हार या जीत "कोई भी माता-पिता अपने बच्चे की तुलना कभी किसी दुसरे बच्चे से ना करे " यह अंतिम स्टेटस था उस लड़की के वोट्सअप पर | जितनी भी तस्वीरें थी भगवान् की उसके कमरे, में वो सब मरने से पहले तोड़ दी थी उसने, ऐसा बताते हैं | एक 18 वर्ष की होनहार छात्रा जो पढ़ाई में भी अव्वल रही और थोड़े बहुत नहीं पुरे ९४% नंबर लाती थी उसने ख़ुदकुशी कर ली | सुनने वालों ने अपनी अपनी प्रतिक्रिया दी | किसी ने कहा माता-पिता गलत हैं, किसी ने कहा कोई चक्कर होगा, किसी ने कहा आजकल के बच्चों को बिलकुल भी सहनशीलता नहीं है तो किसी ने कहा ठीक है अब क्या कर सकते हैं| कोई कुछ नहीं कर सकता क्योंकि किसी के लिए कुछ हुआ ही तो नहीं, यह तो महज एक घटना थी जो हो गई कल फिर कोई घटना होगी और कहाँ तक घटनाओं के बारे में सोचा जाए | फिर वो कौन लगती है किसी की कि उसे सोचा जाए | ये श्रीदेवी या सुशांत सिंह तो थी नहीं जिसकी मौत पर मीडिया आता, कारण खोजा जाता, या फिर खुदखुशी की वजह तलाशी जाती | यह तो एक साधारण सी लड़की थी जिसके इस तरह मर जाने में भी कोई सोचने वाली बात शायद नहीं थी | मगर शायद सोचने ...