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Showing posts from August, 2023

प्रेम और विरह से प्रैक्टिकल होने का सफर.....

आज की इस हाय तौबा वाली जिंदगी में, शायद चाँद पर पहुँचने की जल्दी हैं हमें, और अधिक सुख और वैभव पाने की होड़/दौड़ में आदमी अपने भीतर अपने ही सर्वस्व को मिटाने की जद्दोजहद में शायद लगा पड़ा है या हो सकता है कि जानता ही नहीं वो क्या खो रहा है और क्या पा रहा है| प्रेम से अधिक महत्वपूर्ण जीवन में और कुछ भी नहीं और केवल प्रेम ही को जीवन में शायद समझता भी कोई नहीं |  रेस में रुक नहीं सकते ये प्रेशर है और दौड़ के इतने आदि हो चुके हैं हम कि रुक भी जाए तो गिल्ट खा जाए | ठहरने का अर्थ सिर्फ खोना हैं बस इतना ही जानते हैं | सृष्टि के आरम्भ से ही प्रेम एक ऐसा विषय रहा है जिसका न आदि हैं न अंत | लेकिन प्राचीन समय में ऐसा लगता है कि प्रेम की अभिव्यक्ति को मान्यता थी अथवा उसे सामान्य माना जाता था या फिर उन सब भावों का या मनुष्य मन के प्राकृतिक गुणों का महत्त्व था जो अब वैसा नहीं रह गया है |  कदाचित विषय मैंने ठीक नहीं चुना हो क्योंकि प्रेम और विरह पर लिखना तो संभव ही नहीं हैं लेकिन लौकिक परिभषाओं से परे विशुद्ध प्रेम को पढ़ना मेरी अपनी रूचि है | आज के समय में कबीर और मीरा वाला प्रेम खोजना मुझे समय ...

कहीं हम भी अपराधी तो नहीं.......

  नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो  चाहे जो हो धर्म तुम्हारा चाहे जो वादी हो । नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो ।‍‍‌ जिसके अन्न और पानी का इस काया पर ऋण है जिस समीर का अतिथि बना यह आवारा जीवन है जिसकी माटी में खेले , तन दर्पण-सा झलका है उसी देश के लिए तुम्हारा रक्त नहीं छलका है तवारीख के न्यायालय में तो तुम प्रतिवादी हो । नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो । जिसके पर्वत खेत घाटियों में अक्षय क्षमता है जिसकी नदियों की भी हम पर माँ जैसी ममता है जिसकी गोद भरी रहती है , माटी सदा सुहागिन ऐसी स्वर्ग सरीखी धरती पीड़ित या हतभागिन  ? तो चाहे तुम रेशम धारो या पहने खादी हो । नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो ।   जिसके लहराते खेतों की मनहर हरियाली से रंग-बिरंगे फूल सुसज्जित डाली-डाली से इस भौतिक दुनिया का भार ह्रदय से उतरा है उसी धरा को अगर किसी मनहूस नज़र से खतरा है तो दौलत ने चाहे तुमको हर सुविधा लादी हो । नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो । जीवन का है अर्थ तभी तक जब तक आज़ादी हो । नहीं जी रहे अगर देश के लिए तो अपराधी हो ...