प्रश्न ?
समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याघ्र जो तटस्थ है समय लिखेगा उसका भी अपराध।। एक ही व्यक्ति यदि संवेदनशील नहीं रहा हो तो अधिक समस्या नहीं होती क्योंकि एक तो अपवाद होता है और अपवाद को उदहारण के तौर पर मान्यता नहीं दी जा सकती किन्तु एक समाज जब अपने असंवेदनशील होने का उदाहरण प्रस्तुत करें तो मानवता ख़तरे में ही समझी जानी चाहिए। उज्जैन में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी केवल एक रिक्शा चालक की करतूत पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाती वरन् आठ किलोमीटर की दूरी में मिले हर उस व्यक्ति पर भी लगाती है जिसने उसे ऐसी स्थिति में देखकर नज़र अंदाज़ कर दिया जिस स्थिति में अगर स्वयं की बच्ची को देख लेते तो शायद मौत आ जाती। प्रश्न है सभी अभिभावकों से कि वे अपने बच्चों की नैतिक शिक्षा देने में विफल क्यों हो गए, चरित्र निर्माण का दायित्व पूरा क्यों नहीं कर पाए? प्रश्न है मिडिया से कि वे ऐसे जघन्य अपराध को इतना समय और खोखले शब्द देकर क्यों हल्ला मचाता है जबकि ऐसे सशक्त कदम नहीं उठाता कि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके, जब तक कोई दूसरी खबर मिलेगी तब तक सहानुभूति की आड़ में यही न्यूज़ चलाई जाएगी?...