क्योंकि थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......


"दुनिया तुम्हे सुनने में माहिर बनाएगी,
पर तुम अनसुना करना खुद ही सीखना,
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

वाक् पटु बनाएगा तुम्हे ये संसार,
किन्तु तुम मौन रहना खुद सीख जाना,
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

संसार का बल होगा सबकुछ देखने पे
तुम अनदेखा करना भी सीखते हुए चलना
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

जगत तुम्हे हर जगह महत्त्व दिखाएगा
तुम सारहीन को भी समझते रहना
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

संसार तुम्हे अपने रास्ते चलाएगा
तुम मगर रास्ता अपना मत छोड़ना
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

भुवन तुम्हे अपना कहेगा
मगर तुम उसे सपना समझना
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

ये दुनिया चाहेगी तुम्हे सबकुछ में सम्मिलित करना
पर तुम थोड़े उदासीन भी रहना
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

संसार तुम्हे मंच के करतब दिखाएगा
मगर तुम कोशिश करना परदे के पीछे देखने की
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

ये जगत तुम्हे अभिव्यक्ति के लिए उकसाएगा
मगर तुम अनाभिव्यक्त रहना सीखना
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

सबकुछ याद रखने पर देगा जोर ये भुवन,
लेकिन तुम भूल जाना भी सीखना,
क्योंकि....थोडा सा कुछ 'नहीं' भी अच्छा होता है.......

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