वो अनजान, अजनबी, जिसे किसी ने लिखा नहीं.....


क्या तुम जानते हो उसे?
वही......
अरे ! वही.......
जिसे अपनी गली-मोहल्ले से बाहर कोई जानता नहीं
उस अनजान अजनबी को
लिखना है आज,
जिसे आज तक किसी ने लिखा नहीं
उस अनछुए को छूना है आज
जिसे आज तक किसी ने छुआ नहीं
उस शख्स को,
जिसे अपने ही मोहल्ले के बाहर कोई जानता नहीं...........
उसने बाल कब कटवाए
कब उसने सस्ती सी नई चप्पल खरीदी
इसका कोई जिक्र नहीं
दरजी के सिले कपड़ों को
किसी ने नॉटिस किया नहीं
जिसका किसी ब्रांड से कोई वास्ता नहीं
वो कौनसी क्रीम लगाता है, और कौनसा इत्र
उस महक का किसी को अंदाजा नहीं
आज उसकी शोपिंग का शिड्यूल लिखना है ...........
उसकी आँखें खुबसूरत है
या उसकी कदकाठी अच्छी
वो दिखता अच्छा है या फिर
उसकी आवाज़ अच्छी
ऐसा भी कभी किसी ने बताया नहीं
जिसे कभी किसी ने सुन्दर कहा ही नहीं
आज उसकी सुन्दरता को लिखना है ..........
उसके जन्मदिन पर ढेरों उपहार नहीं आए
कोई सरप्राइज़ पार्टी नहीं हुई
फूलों के गुलदस्ते नहीं आए
जो नहीं गया क्लब में
होटल में जिसने कभी खाना भी खाया नहीं
आज उसका B'day Celebration लिखना है...............
जिसने पाउट बनाकर सेल्फी ली नहीं
फीलिंग एक्स्साईटेड ओर सेड के अपडेट दिए नहीं
जिया तो ख़ुशी और गम का हर पल
मगर इन्स्टा पर किसी को टैग भी किया नहीं
सोशल मीडिया की दस्तक ने भी जिसे जगाया नहीं
आज उसकी अभिव्यक्ति का माध्यम लिखना है.........
जिसके आगे पीछे लोगो की भीड़ नहीं
जिसके बड़े बड़े लोगो से ताल्लुकात नहीं
अखबारों में जिसकी फोटो नहीं छपी
भीड़ का वो वांच्छित अवांछित हिस्सा
जिसका कोई किस्सा भी नहीं
मिडिया को भी जिसके किरदार में कोई रूचि नहीं
और तो और खुद उसे भी किसी में दिलचस्पी नहीं
आज उसका सामाजिक जीवन लिखना है.............
पढ़ लिखकर वो बहुत बड़ा आदमी बना नहीं
बड़े बड़े महाविद्यालयों से होकर जो गुजरा नहीं
डिग्रियों का जिसके पास कोई पुलिंदा नहीं
पंचायत में किसी ने जिसे पञ्च बनाया नहीं
और राजनीतिज्ञों ने जिसके घर डेरा डाला नहीं
किसी ने आज तक उसकी शिक्षा को सराहा नहीं
आज उसकी शिक्षा का सार लिखना है............
कुरआन, वेद-पुराणों का जो पाठी नहीं
भागवत का पाठ भी जिसने कभी करवाया नहीं
मंदिर-मस्जिद में जिसने भगवान् को भी दर्शन अपना दिया नहीं
एक सिक्का दान देते भी जिसे किसी ने देखा नहीं
ना देखा भजन, नाम कीर्तन करते
साधू खिलाते, भंडारे जिमाते
ना ही तीर्थों पर फिरते
पाप पुण्य का जिसका कोई लेखा नहीं
आज उसके धर्म के मर्म को लिखना है..............
सीमा पर जो देश के लिए लड़ा  नहीं
तान कर सीना जो दुश्मनों से भिड़ा नहीं
झोली में जिसके कोई आविष्कार नहीं
सम्मान, पदक और वाहवाही का कोई वाद नहीं
मंच पर वो गया नहीं
भाषण उसने दिए नहीं
रचा नहीं इतिहास
अजूबा कुछ भी तो उसने किया नहीं
आज उसी का राष्ट्रीय जीवन लिखना है............
आज जब संसार सारा व्यस्त है
भरे हुए समुद्र में अपने घड़े उड़ेलने में
मुझे अपना लोटा भर जल उस सूखे कुए में डालना है
जिसे आज तक किसी ने सोचा ही नहीं
हाँ
वही, जिसे अपने ही मोहल्ले के बाहर कोई जानता भी नहीं
आज उस व्यक्ति के बारे में लिखना है
वही, अजनबी, अनजान
जिसे आज तक किसी ने लिखा ही नहीं..........!!


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