2019 से 2020 - अंधकार से प्रकाश की यात्रा
आसमान में दिखने वाले
काले बादल केवल अंधकार का प्रतीक नहीं अपितु उस प्रकाश के आगमन का भी संकेत हैं जो
इनके छटते ही अपनी छटा बिखेरने को लालायित है । कई मायनों में वर्ष 2019 समूची भरतभूमि के लिए
अत्यधिक हलचल भरा वर्ष रहा ।
राजनैतिक उथल पुथल
वैसे एक आम बात है किंतु बीते वर्ष ने जितने घटाटोप झेले हैं उतनी उलझने कदाचित ही
कभी देखने को मिली हों । सत्ता के लिए संघर्ष करना कोई नयी बात नहीं है किंतु
सत्ता हथियाने के लिए अपनी ही नीतियों को बदल डालने को लालच के अतिरिक्त और क्या
कहा जाए ?
आर्थिक संघर्ष तो सतत
जारी है ही, आलू
प्याज तो प्रतीक मात्र हैं, दुख तो उनका पूछा जाए जिनको अपनों की शारीरिक
बीमारियों ने एवं बच्चों की शिक्षा के बोझ ने मानसिक रूप से बीमार कर रखा है ।
नौकरशाही में जो
ईमानदार हैं और जिन्हे अपने ऊपर विश्वास है, उनको तो कदाचित बहुत
पीछे कौने में धकेल दिया गया है, काश उन्हें भी चापलूसी आती होती तो वे भी निर्णय लेने
वाले की कुर्सी के बराबर वाली कुर्सी पर बैठे होते ।
क्षेत्र कोई भी क्यों
न हो, उथल
पुथल में कोई कमी नहीं रही ।
बीते वर्ष में बहुत
बड़े बड़े निर्णय भी हुए । अधिकांश तो राजनीति प्रेरित ही है, हो भी सकता है इनमें
से कुछ निर्णय कुछ लोगों के जीवन में नया सवेरा लेकर भी आ जाए ।
निर्णय की सामर्थ्य
उनके पास थी जो कुर्सी पर बैठे थे, इसलिए विश्लेषण भी वे ही कर सकते हैं । इस निर्णय
लेने की प्रक्रिया में दूसरे कितने लोग भागीदार हैं इसे बताने की आवश्यकता नहीं है
। इतना ही बताना पर्याप्त है कि एक शिक्षाविद ने किसी निर्णय पर अंगुली उठा दी तो
उनको मिलने वाली अगली कुर्सी से हाथ धोना पड़ा ।
इस सबके बीच एक
सामान्य भारतीय नागरिक के लिए बीता वर्ष भारीपन का अहसास वाला ही रहा ।
सरकार और नौकरशाह तो
क्रमशः तानाशाही और चापलूसी के परकोटे से बाहर नहीं आते, यहाँ तक कि शैक्षणिक
परिसरों में भी इन्हीं की धाक है। चापलूसों की टोलियाँ वहाँ भी पैर जमा कर बैठ गई ।
एक उम्मीद थी प्रकृति
से तो वो भी इन्हीं की करवट बैठ गई ।
जो भी हो, इस देश में जब भी जन
सामान्य को अत्यंत परेशानी के पहाड़ का सामना करना पड़ा तभी अचानक पहाड़ के पीछे
तलहटी दिखाई दी । काले बादलों के पीछे से सूर्य की रोशनी दिखाई दी । कृष्ण पक्ष की
सघन अमावस्या को चीरता हुआ शुक्ल पक्ष दिखाई दिया । वैसे ही जैसे कठिनाइयों भरे
वर्ष 2019 को पीछे धकेलता स्वर्णिम वर्ष 2020 दिखाई दे रहा है।
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